अररिया : मंत्री के आबोभगत में डॉक्टर मस्त और पीड़ित पस्त

शनिवार को जहां एक ओर सूबे के स्वास्थ्य मंत्री फारबिसगंज अनुमंडल अस्पताल के दौरे पर आने वाले थे वही दूसरी ओर अस्पताल में उसी समय एक दलित और गरीब गर्भवती महिला के प्रति डॉक्टरों के संवेदनहीनता का मामला सामने आया है।
सूबे में बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के उद्देश्य की कड़ी में अस्पताल में 6.30 करोड़ की लागत से एएनएम प्रशिक्षण संस्थान का शिलान्यास करने की तैयारी हो रही थी और एक गर्भवती महिला को व्यवस्था की मार झेलनी पड़ रही थी।
मामले की जानकारी देते हुए पीड़ित महिला के ससुर वार्ड संख्या 8 निवासी नरेश पासवान ने कुव्यवस्था का वृतांत बताते हुए कहा कि मेरी बहू रजनी देवी पति राजा पासवान को शनिवार की सुबह 10 बजे अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने पर हम लोग अनुमंडल अस्पताल लेकर आए। यहां पर आने के बाद सिपाही ने कहा कि सबसे पहले पुर्जी कटाओ। पुर्जी कटाने गया तो वहां 2 रुपया की जगह 5 रुपया लिया गया। इसके बाद डॉक्टर साहिबा ने देखा और बहू को प्रसव गृह में भेज दिया, जहां बहुत देर इंतजार करने के बाद भी जब कोई डॉक्टर नहीं आया और मेरी बहू प्रसव पीड़ा से छटपटा रही थी तब मैं जा कर पुनः डॉक्टर से मिला तो उन्होंने कहा यहां पर मंत्री महोदय आने वाले हैं इसलिए यहां इलाज नहीं हो सकता है। इसे किसी प्राइवेट अस्पताल में लेकर जाओ और मेरे हाथ से सरकारी पुर्जी जो मैंने कटाया था वह ले लिया गया। और हॉस्पिटल में ही कार्यरत एक दाई के यहां ले जाकर प्रसव करवाने का सलाह दिया गया। हम ने जब एंबुलेंस का मांग किया तो मुझे कहा गया कि यहां का सभी एंबुलेंस खराब है। किसी तरह हम लोग उक्त दाई के यहां बहू को लेकर गए और प्रसव करवाया।
सूबे में बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के उद्देश्य की कड़ी में अस्पताल में 6.30 करोड़ की लागत से एएनएम प्रशिक्षण संस्थान का शिलान्यास करने की तैयारी हो रही थी और एक गर्भवती महिला को व्यवस्था की मार झेलनी पड़ रही थी।
मामले की जानकारी देते हुए पीड़ित महिला के ससुर वार्ड संख्या 8 निवासी नरेश पासवान ने कुव्यवस्था का वृतांत बताते हुए कहा कि मेरी बहू रजनी देवी पति राजा पासवान को शनिवार की सुबह 10 बजे अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने पर हम लोग अनुमंडल अस्पताल लेकर आए। यहां पर आने के बाद सिपाही ने कहा कि सबसे पहले पुर्जी कटाओ। पुर्जी कटाने गया तो वहां 2 रुपया की जगह 5 रुपया लिया गया। इसके बाद डॉक्टर साहिबा ने देखा और बहू को प्रसव गृह में भेज दिया, जहां बहुत देर इंतजार करने के बाद भी जब कोई डॉक्टर नहीं आया और मेरी बहू प्रसव पीड़ा से छटपटा रही थी तब मैं जा कर पुनः डॉक्टर से मिला तो उन्होंने कहा यहां पर मंत्री महोदय आने वाले हैं इसलिए यहां इलाज नहीं हो सकता है। इसे किसी प्राइवेट अस्पताल में लेकर जाओ और मेरे हाथ से सरकारी पुर्जी जो मैंने कटाया था वह ले लिया गया। और हॉस्पिटल में ही कार्यरत एक दाई के यहां ले जाकर प्रसव करवाने का सलाह दिया गया। हम ने जब एंबुलेंस का मांग किया तो मुझे कहा गया कि यहां का सभी एंबुलेंस खराब है। किसी तरह हम लोग उक्त दाई के यहां बहू को लेकर गए और प्रसव करवाया।
तो क्या अस्पताल के वार्ड में मंत्री के द्वारा निरीक्षण में जो बेड पर मरीज था वो भाड़े का तो नहीँ?
ये भी जानना जरूरी है।
आखिर मंत्री का आवोभगत जरूरी था या मरीज का उपचार?
ये भी जानना जरूरी है।
आखिर मंत्री का आवोभगत जरूरी था या मरीज का उपचार?

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