Tuesday, 3 April 2018

पंचतत्व में विलीन हुए मोसुल में मारे गये बिहार के लोग, परिजनों ने की सरकार से नौकरी देने की मांग

पटना / सीवान : इराक के मोसुल में मारे गये बिहार के विद्याभूषण तिवारी और संतोष कुमार सिंह का रघुनाथपुर प्रखंड पतार में सरयू नदी के किनारे और जमादार सिंह, धर्मेंद्र कुमार, सुनील कुमार कुशवाहा का दरौली में सरयू नदी के तट पर अंतिम संस्कार किया गया. पांचों बिहारियों के शवों का अवशेष मंगलवार की अहले सुबह करीब तीन-चार बजे सीवान पहुंचा. शवों को पहले पुलिस लाइन लाया गया. यहां जिलाधिकारी महेंद्र कुमार, पुलिस अधीक्षक नवीन चंद्र झा तथा परिवार के सदस्य शव आने के इंतजार में पहले से ही मौजूद थे. पुलिस लाइन पहुंचने पर जिला प्रशासन और परिवार के लोगों ने शवों पर पुष्प अर्पित किया. मैरवा के धर्मेंद्र खरवार, जमादार सिंह एवं सुनील कुमार कुशवाहा का शव उनके परिजन लेकर मैरवा ले गये. 
दो लोगों के परिजनों ने किया अवशेषों को लेने से इनकार
मोसुल में मारे गये पांच बिहारियों में दो मृतकों संतोष कुमार सिंह और विद्याभूषण तिवारी के परिजन शव लेने नहीं पहुंचे. इसके बाद प्रशासन ने अपने स्तर से दोनों शवों को उनके घर तक पहुंचाया. संतोष कुमार सिंह और विद्याभूषण तिवारी के शवों को स्थानीय अधिकारी आंदर प्रखंड के सहसराव गांव ले गये. हालांकि, शवों को ले गये अधिकारियों को परिजनों को सौंपने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. परिजनों की मांग थी कि जब तक प्रशासन लिखित रूप से आश्वासन नहीं देता कि उनके परिजनों को मुआवजा और आश्रितों को नौकरी मिलेगी, तब तक वे शव को स्वीकार नहीं करेंगे. हालांकि, अधिकारियों के काफी समझाने-बुझाने के बाद परिजनों ने शव को स्वीकार कर अंतिम संस्कार किया. इस संबंध में मृत जमादार सिंह के परिजन श्याम कुमार कहते हैं, 'जब तक सरकार परिवार की रक्षा में वित्तीय सहायता का आश्वासन नहीं देगी, हम मृत शरीर को ग्रहण नहीं करेंगे.' मृतक सुनील कुमार कुशवाहा की पत्नी पूनम देवी कहती हैं, 'वे ही एकमात्र रोटी कमानेवाले थे और अब मुझे अपने बच्चों की परवरिश के लिए नौकरी चाहिए.' 

Labels:

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home