*ये जनता की जिद की जीत है*
दिघलबैंक प्रखण्ड के इकरा ग्रामवासी बेहद उत्साहित हैं। खुश होने की वजह भी खास है। दरअसल गाँव में आरसीसी रोड का निर्माण हो रहा है, जिसे ग्रामीण अपनी जिद की जीत का प्रतीक मान रहे हैं। हकीकत भी ऐसा ही है। बाढ़ के बाद से गांव वालों ने पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। गांव के लोग कादो कीचड़ से सालों से लोग परेशान थे, ऊपर से सांसद आदर्श ग्राम होने का ठप्पा लगा हुआ है। इस बाबत मुखिया से बार बार शिकायत की जाती थी पर हजार बहाने बताए जाते थे। जिससे ग्रामीण फूंके हुए थे।
बाढ़ के बाद जब हर तरफ सड़क मरमत्ती का काम शुरू हुआ तो यहां पर मुसीबत से छुटकारे के लिए पंचायत की ओर से कोई पहल नहीं की गई। फिर क्या था बकरीद के दूसरे दिन ही गाँव के युवा बाइक पर सवार होकर मुखिया के घर जवाब तलब करने पहुंच गए। इससे पहले खैखाट से लेकर लोहागढ़ा हाट तक जमकर नारेबाजी की और अपना दुखड़ा सबको बता दिया। फिर भी पंचायत प्रतिनिधि का बहाने बनाने का नुस्खा बरकरार रहा।
इकरा के लोग डिगे नहीं और न ही थके, एक दिन बैनर पोस्टर लेकर सभी युवा ब्लॉक मुख्यालय पहुंच गए, हंगामा देख बीडीओ तो पहले खूब झल्लाया जैसा कि अमूमन कोई भी अधिकारी करते हैं। सभी युवाओं ने साफ किया कि उम्मीद आप से है और गुस्सा भी आप से ही है। बीडीओ के सात ससम्मान लोगों की बातचीत हुई और तय हुआ कि गांव वालों को चंद दिनों में इस मुसीबत से निजात मिल जाएगी। अब तो नतीजा सबके सामने में है।
इससे उत्साहित गांव के युवा अब ठान चुके हैं काम के लिए सीधे बीडीओ साहेब से ही मिलना है। खास बात ये है कि इस मुहिम में खबर सीमांचल की टीम का बराबर सहयोग रहा और लोहागढ़ा हाट में प्रदर्शन के दिन हसन जावेद, नजरुल इस्लाम ने खुद साथ रहकर आगे की रणनीति का खाका ग्रामीणों को बताया, मुहिम की सफलता में सज्जाद नूरी और उनकी युवा टोली का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आखिर में पंचायत प्रतिनिधियों ने सहयोग करना शुरू किया है। बहरहाल जनता के जागने पर विकास का हर काम सम्भव है, प्रशासन के पास फण्ड की कोई कमी नहीं है। इकरा में डेवलपमेन्ट इस बात की मिसाल है।
दिघलबैंक प्रखण्ड के इकरा ग्रामवासी बेहद उत्साहित हैं। खुश होने की वजह भी खास है। दरअसल गाँव में आरसीसी रोड का निर्माण हो रहा है, जिसे ग्रामीण अपनी जिद की जीत का प्रतीक मान रहे हैं। हकीकत भी ऐसा ही है। बाढ़ के बाद से गांव वालों ने पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। गांव के लोग कादो कीचड़ से सालों से लोग परेशान थे, ऊपर से सांसद आदर्श ग्राम होने का ठप्पा लगा हुआ है। इस बाबत मुखिया से बार बार शिकायत की जाती थी पर हजार बहाने बताए जाते थे। जिससे ग्रामीण फूंके हुए थे।
बाढ़ के बाद जब हर तरफ सड़क मरमत्ती का काम शुरू हुआ तो यहां पर मुसीबत से छुटकारे के लिए पंचायत की ओर से कोई पहल नहीं की गई। फिर क्या था बकरीद के दूसरे दिन ही गाँव के युवा बाइक पर सवार होकर मुखिया के घर जवाब तलब करने पहुंच गए। इससे पहले खैखाट से लेकर लोहागढ़ा हाट तक जमकर नारेबाजी की और अपना दुखड़ा सबको बता दिया। फिर भी पंचायत प्रतिनिधि का बहाने बनाने का नुस्खा बरकरार रहा।
इकरा के लोग डिगे नहीं और न ही थके, एक दिन बैनर पोस्टर लेकर सभी युवा ब्लॉक मुख्यालय पहुंच गए, हंगामा देख बीडीओ तो पहले खूब झल्लाया जैसा कि अमूमन कोई भी अधिकारी करते हैं। सभी युवाओं ने साफ किया कि उम्मीद आप से है और गुस्सा भी आप से ही है। बीडीओ के सात ससम्मान लोगों की बातचीत हुई और तय हुआ कि गांव वालों को चंद दिनों में इस मुसीबत से निजात मिल जाएगी। अब तो नतीजा सबके सामने में है।
इससे उत्साहित गांव के युवा अब ठान चुके हैं काम के लिए सीधे बीडीओ साहेब से ही मिलना है। खास बात ये है कि इस मुहिम में खबर सीमांचल की टीम का बराबर सहयोग रहा और लोहागढ़ा हाट में प्रदर्शन के दिन हसन जावेद, नजरुल इस्लाम ने खुद साथ रहकर आगे की रणनीति का खाका ग्रामीणों को बताया, मुहिम की सफलता में सज्जाद नूरी और उनकी युवा टोली का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आखिर में पंचायत प्रतिनिधियों ने सहयोग करना शुरू किया है। बहरहाल जनता के जागने पर विकास का हर काम सम्भव है, प्रशासन के पास फण्ड की कोई कमी नहीं है। इकरा में डेवलपमेन्ट इस बात की मिसाल है।


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