लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटा राजद, जानें क्या है चुनौती
पटना : चारा घोटाले के चौथे मामले में लालू प्रसाद को सीबीआई कोर्ट द्वारा सबसे बड़ी सजा सुनाये जाने के बाद राजद लोकसभा और विधानसभा का चुनाव लड़ने की रणनीति में जुट गया है. ऊंची अदालत से लालू प्रसाद को जमानत नहीं मिलने की स्थिति में तेजस्वी प्रसाद यादव के नेतृत्व में ही पार्टी संगठन मजबूत रखेगी और चुनाव मैदान में भी उतरेगी. बजट सत्र के बाद पार्टी के विधायक दल की बैठक बुलायी गयी है.शनिवार की रात नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पार्टी के प्रमुख और वरीय लीडरों के साथ बैठक कर उनसे सहयोग और मार्गदर्शन मांगा. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता विधायक भाई वीरेंद्र ने बताया कि बैठक संगठन और पार्टी को मजबूत करने के लिए की गयी थी. इसमें 2019 के लोकसभा चुनाव और 2020 के विधानसभा चुनाव का लक्ष्य पूरा करने पर भी चर्चा की गयी. बैठक में सीनयर लीडरों को जिलों का प्रभारी बनाने का निर्णय लिया गया. साथ ही पार्टी ने अपने नेता और कार्यकर्ताओं को सरकार की गलत नीतियों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने की योजना तैयार की. बजट सत्र के समाप्त होने के बाद पांच अप्रैल को राजद विधायक दल की बैठक बुलायी गयी है.
दो मोर्चों पर चुनौती : राजद सुप्रीमो को सजा होने के बाद उनकी विरासत संभाल रहे नेता तेजस्वी यादव को दो मोर्चों पर लड़ना है. पहला, पिता को जेल से बाहर लाना है जो वह वकीलों की मदद से लड़ रहे हैं. दूसरी, पिता की गैरमौजूदगी में पार्टी को एकजुट रखना है और विरोधियों को मात भी देनी है. इसके लिए उनके सामने पार्टी के वरीय नेताओं को संतुष्ट रखने और कार्यकर्ताओं को साधने की चुनौती है. अभी पार्टी उनके साथ खड़ी है. लालू प्रसाद को सजा सुनाये जाने के बाद आगे की रणनीति के लिए तेजस्वी ने बैठक करने में कोई देरी नहीं की.
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