#तबाही और बदहाली का नाम है #मजकुरी

अररिया जिला के सीमांत पर बसा #किशनगंज जिले का #मजकुरी गाँव तबाही और बदहाली के लिए जाना जाता है। बाढ़ व सैलाब का नाम सुनते ही लोगों के जेहन में गांव की बर्बादी की तस्वीर अब भी उभरती है। मुख्यधारा से कटे मजकुरी को वास्तव में विस्थापितों का गांव कहा जाता है। दरअसल कनकई नदी किनारे बसे होने की वजह से हर साल यहां बाढ़ आफत लेकर आती है जिससे ग्रामीणों के अरमानों पर पानी फिर जाता है। सैलाब के बाद धीरे धीरे जिंदगी पटरी पर लौटती है फिर बाढ़ की मुसीबत से सामना हो जाता है। गांव के हाजी रकीमुद्दीन का कहना है कि हाल फिलहाल में सबसे पहले ये गांव 1987 में बर्बाद हुआ और पूरी आबादी दो हिस्सों में बंट गई, तब से आशियाना पश्चिम पार और खेतीबारी नदी के पूरब होने लगी, वार्ड नम्बर 8 और 9 के लोगों की जिंदगी ऐसे ही दो राहे पर खड़ी है।
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