Friday, 2 February 2018

ऑपरेशन ग्रीन व हेल्थ इंश्योरेंस अच्छा कदम

Image result for ehealthinsuranceअररिया : गुरुवार को प्रस्तुत केंद्रीय बजट पर शहर वासियों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है. पर इतना जरूर महसूस किया जा सकता है कि प्रस्तुत बजट को लेकर लोगों में बहुत उत्साह नहीं है. बुद्धिजीवियों का एक वर्ग इस बजट को मायूस करने वाला बताया है. वहीं श्रमिकों के हक-हकूक की लड़ाई लड़ने वाले संगठनों का कहना है कि बजट में किसानों की आमदनी बढ़ाने के बजाये उन्हें कर्जदार बनाने पर जोर दिया गया है. व्यापार जगत भी अपने लिए कोई छूट बजट में नहीं देख पा रहा है.
 
बजट पर अपनी राय देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता शैलेंद्र शरण कहते हैं कि आम तौर पर बजट में मध्य वर्ग को विशेष ध्यान रखा जाता था, पर इस बार ऐसा नहीं हुआ है. किसानों की बात तो की गयी है, लेकिन केवल लुभावने वायदे ही हैं. ऐसे वायदे जिनका कभी कोई लाभ किसानों को नहीं मिलता है. बजट से यह संकेत मिलता है कि आम चुनाव वर्ष 2019 के बजाये 2018 में हो सकते हैं. 
 
आर्थिक मामलों के जानकार व अल शम्स मिल्लिया डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रो रकीब अहमद मानते हैं कि बजट ने मायूस किया है. आयकर स्लैब में बदलाव नहीं होना निराश करता है. किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की घोषणा का कोई मायने मतलब नहीं है. किसानों को कभी इसका लाभ ही नहीं मिलता है. प्रो अहमद कहते हैं कि बिहार को विशेष पैकेज की उम्मीद थी. पर मायूसी हुई. 
हां उन्होंने इतना जरूर माना कि ऑपरेशन ग्रीन, बांस उद्योग पर ध्यान व हेल्थ पॉलिसी के तहत राशि का प्रावधान अच्छा कदम है. टीबी रोगियों के प्रति माह 500 रुपये का प्रावधान भी स्वागत योग्य है.

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