किशनगंज : पीएचइडी विभाग में 18 करोड़ का शौचालय घोटाला
उल्लेखनीय है कि दो अक्तूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्मल भारत मिशन अभियान का शुभारंभ किया था. निर्मल भारत मिशन के अभियान के तहत शौचालय निर्माण का काम पीएचइडी विभाग को दिया गया था. लाभुकों को स्वयं शौचालय बनाना था. शौचालय निर्माण हो जाने पर लाभुकों को 10 हजार या 12 हजार भुगतान किया जाता था. दो अक्तूबर 2014 से 30 जून 2016 तक किशनगंज पीएचइडी विभाग ने 19586 लाभुकों की इंट्री कर उन्हें राशि का भुगतान किया. परंतु जून 2016 के बाद जब स्वच्छ भारत मिशन का जिम्मा ग्रामीण कार्य विभाग को सौंप दिया गया, तो पीएचइडी विभाग के अनुसार उन्होंने 12335 लाभुकों का अभिलेख डीआरडीए को सौंप दिया़
किशनगंज : पीएचइडी विभाग...
कैसे हुआ मामले का खुलासा : मामला तब प्रकाश में आया जब लोहिया स्वच्छ मिशन के तहत प्रखंडों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए लक्ष्य के निर्धारण हेतु सर्वे का काम किया गया. सर्वे के दौरान अक्तूबर 2014 से जून 2016 के बीच पीएचइडी द्वारा जिन लाभुकों को शौचालय निर्माण के बाद भुगतान किया है उन लोगों का कोई अता पता ही नहीं है. कुछ लोग जिनका पता चला उन्होंने न तो शौचालय निर्माण कराया है, न ही उन्हें पीएचइडी विभाग
डीएम ने दिये थे जांच के आदेश : मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम पंकज दीक्षित ने सभी लाभुक की जांच कराये. जांच में सिर्फ 1754 लाभुक का ही पीएचइडी के लाभुक सूची से मिलान हो सका है. शेष 17832 फर्जी इंट्री पाया गया है.
करोड़ों का है शौचालय घोटाला : प्रथम दृष्टया किये गये इस जांच में कितनी राशि का गबन हुआ है इसकी जांच नहीं की गयी है. किसी लाभुक को 10 हजार किसी को 12 हजार रुपये की दर से भुगतान किया गया है. एक अनुमान के मुताबिक यदि 10 हजार रुपये ही प्रति लाभुक मान लिया जाये तो 17 करोड़ 83 लाख 20 हजार रुपये गबन का अनुमान है़
पदाधिकारी कर्मी समेत 16 जांच के घेरे में : जिलाधिकारी द्वारा कराये गये शौचालय घोटाले की जांच के घेरे में पीएचइडी विभाग के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता शिव बिहारी कुमार सहित 16 लोग शामिल है. हालांकि शिव बिहारी प्रसाद का विगत वर्ष स्वर्गवास हो गया है. इसके अलावे तत्कालीन सहायक अभियंता नवी हसन, सहायक अभियंता अनवारूल हक, कनीय अभियंता अवधेश कुमार सिंह, संविदा पर बहाल कनीय अभियंता मनीर अंसारी, कनीय अभियंता संविदा अभिषेक कुमार, जिला समन्वयक अर्जुन कुमार, प्रखंड समन्वयक नोमान जहीदी, प्रखंड समन्वयक मुस्ताक आलम, प्रखंड समन्वयक इमरान आलम, प्रखंड समन्व्यक संतोष नायक, प्रखंड समन्वयक हरेंद्र सिंह, प्रखंड समन्वयक उपेंद्र गणेश, कंप्यूटर डाटा ऑपरेटर रवि कुमार, कार्यवाहक सहायक विनोद कुमार सिंह एवं कार्यवाहक सहायक राजीव कुमार जांच के घेरे में है़
मामला 2014 से 2016 तक का है. इस योजना के सभी दस्तावेज पूर्व में ही ग्रामीण विकास विभाग को सौंप दिया गया था. इसलिए इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.
विपुल कुमार नंदन, कार्यपालक अभियंता, पीएचइडी
पीएचइडी द्वारा डीआरडीए को सौंपे गये लाभुकों के दस्तावेज के अनुसार सूची
प्रखंड-लाभुकों की संख्या
किशनगंज-2370
बहादुरगंज-1236
ठाकुरगंज-1364
दिघलबैंक-1641
पोठिया-2047
टेढ़ागाछ-295
कोचाधामन-338
डीएम ने एक तत्कालीन कार्यपालक अभियंता समेत 2 सहायक अभियंता, 3 कनीय अभियंता, एक जिला समन्वयक, सात प्रखंड समन्वयक, एक कंप्यूटर ऑपरेटर व दो कार्यवाहक सहायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का दिया आदेश
नामजद अभियुक्तों में सहायक अभियंता वर्तमान में अन्य जिलों में कार्यपालक अभियंता के पद पर हैं पदस्थापित
जांच में लगभग 17 हजार लाभुक मिसिंग हैं. इस संबंध में पीएचइडी विभाग के 16 लोगों को चिह्नित कर उन्हें नामजद अभियुक्त बनाते हुए डीआरडीए निदेशक को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया है.
पंकज दीक्षित, डीएम, किशनगंज
credit p.k
Labels: khabar seemanchal

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