Saturday, 7 October 2017

मिट्टी के घर से IIT मुंबई तक का सफर: जी हां! उड़ान पंख नहीं, हौसले से होती है

पटना [सदगुरु शरण] यह कहानी है आइआइटियन अनूप राज की। लाखों गुदड़ी के लालों को समर्पित, जो कामयाबी का आसमां छूने की ख्वाहिश और कूबत तो रखते हैं, पर गांवों में प्रारंभिक शिक्षा की बदहाली, साधनहीनता, मार्गदर्शन के अभाव और अंग्रेजी के आतंक के कारण सपने साकार करने का हौसला छोड़ देते हैं। घोर नक्सल प्रभावित एवं स्कूलविहीन गांव में जन्मे एक ऐसे बच्चे की मोहित कर देने वाली प्रेरक कहानी, जिसने 10 साल की उम्र तक स्कूल का मुंह नहीं देखा, पर अगले आठ सालों में जिसने शिक्षा के लिए जुनून से अपना प्रारब्ध बदलकर रख दिया।

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