बिहार नियोजित शिक्षक : समान वेतन पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपी रिपोर्ट, कहा, विशेष परीक्षा पास करने पर ही बढ़े वेतन
पटना : नियोजित शिक्षकों के समान काम के बदले समान वेतन मामले में राज्य सरकार ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार द्वारा गठित मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट में नियोजित शिक्षकों की वेतन वृद्धि के लिए फिल्टरेशन प्रक्रिया अपनाने की बात कही गयी है. इस प्रक्रिया के तहत विशेष परीक्षा के आयोजन का सुझाव दिया गया है.
कर्मचारी चयन आयोग अथवा अन्य गठित एजेंसी के माध्यम से इस परीक्षा का आयोजन किया जा सकता है. परीक्षा में शामिल होने के लिए दो अवसर प्रदान किये जायेंगे. उत्क्रमित वेतन के लिए यह परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा. रिपोर्ट में पहली बार विशेष परीक्षा का आयोजन इस वर्ष सितंबर माह में करने का सुझाव दिया गया है. शिक्षक और पुस्तकालयाध्यक्षों के लिए पदनाम के साथ पे-मैट्रिक्स कोटि भी प्रस्तुत की गयी है. परीक्षा पास करने वालों को रिजल्ट प्रकाशन की तिथि से उत्क्रमित वेतन देय होगा.
राज्य सरकार के वित्तीय संसाधन से देनदारी संभव नहीं : रिपोर्ट में फिल्टरेशन प्रक्रिया की अनुशंसा के साथ ही समान वेतन के भुगतान में असमर्थता जतायी गयी है. कहा गया है कि नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन संबंधी पटना हाईकोर्ट के आदेश पर कार्यान्वयन संबंधी सुझाव पर कार्रवाई वित्तीय दृष्टिकोण से अव्यावहारिक है.
इस आदेश का पालन करने पर लगभग 5200 करोड़ बकाया राशि की देनदारी होगी, जो राज्य सरकार के वित्तीय संसाधन से संभव नहीं है. इसके अलावा रिपोर्ट में पंचायत, नगर निकाय आदि के तहत शिक्षकों की नियुक्ति, खर्च आदि के संबंध में जानकारी दी गयी है. कहा गया है कि प्रारंभिक व माध्यमिक नियोजित शिक्षकों के वेतन मद में बजट में 8924 करोड़ रुपये का प्रावधान है.
यह पुनरीक्षित वेतन के पूर्व की राशि है. यदि पुनरीक्षित वेतन की दर से 17 प्रतिशत की वृद्धि करने पर कुल राशि10,441 करोड़ रुपये हो जायेगी. इसके अलावा विभिन्न योजना मद की राशि, शिक्षकों की संख्या आदि का ब्योरा रिपोर्ट में दिया गया है.
via parbhat khabar
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