Tuesday, 21 November 2017

किसानों का धान नही खरीद रही सरकार, फायदा उठा रहे बिचौलिये-सेठ-साहूकार


हमारे देश में किसान को भगवान कहा जाता है, क्योंकि वह धरती पर रहने वाले सभी मनुष्यों ही नहीं बल्कि जीव जन्तुओं तक के पेट भरता है। किसान की खेती ही एक ऐसी जरिया होती है जिससे सभी अपने साल भर पेट भरने की व्यवस्था कर लेते हैं। किसान जो सिर्फ अनाज पैदा करता है उसमें फायदा कम नुकसान होने की आशंका अधिक रहती है क्योंकि खेती मेहनत से ज्यादा मौसम पर निर्भर होती है। किसानों के भी तीन चार वर्ग होते हैं जिनमें किसानों के एक वर्ग को खेतिहर मजदूर दूसरे को लघु सीमांत कहते हैं। दो ढाई हेक्टेयर भूमि वाले किसानों को अनाज पैदा करने में अधिक लागत लगानी पड़ती है जबकि बीस बीघा से अधिक भूमि वालों को लागत कम लगानी पड़ती है। अब किसानों का एक वर्ग ऐसा है जो फार्मिंग करता है और व्यवसायिक खेती करता नही बल्कि करवाता है। इस देश में सबसे ज्यादा परेशान वह किसान है जो कम खेती करता है। वह अगर अनाज की खेती नहीं करता है और व्यवसायिक करता है तो उसके बच्चे भूखें रह जाते हैं वैसे किसानों का जब धान सरकार नही खरीदती है तो वे बेवश हो कर अपना धान बिचौलियो सेठ साहूकरों को बेचने पर मजबूर हो जाते है। किसानों का यहीं वर्ग ऐसा होता है जो दैवी प्रकोप या बीमारी से फसल तबाह होने पर बर्बाद हो जाता है और कभी कभी कर्ज से डूबकर जान दे देता है।किसानों को बिचौलियों सेठ साहूकारों के चंगुल से बचाकर उनके उत्पादन का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार धान गेहूं आदि की सरकारी खरीद मूल्य निर्धारित करके विभिन्न सरकारी व अर्द्धसरकारी संस्थाओं करवाती है

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